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IDFC First Bank में ₹590 करोड़ का चौंकाने वाला फ्रॉड: एक ब्रांच ने कैसे मचाई तबाही?

  • Feb 24
  • 2 min read

23 फरवरी 2026 को भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा झटका लगा। IDFC First Bank ने स्टॉक एक्सचेंज को सूचना दी कि उसके चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ अकाउंट्स में लगभग ₹590 करोड़ का संदिग्ध फ्रॉड हुआ है। ये मामला इतना गंभीर है कि बैंक के शेयर एक दिन में 20% तक गिर गए और लोअर सर्किट लग गया। मार्केट कैप में ₹14,000 करोड़ से ज्यादा की कमाई एक झटके में गायब!

कैसे शुरू हुआ ये पूरा ड्रामा?

सब कुछ तब शुरू हुआ जब हरियाणा सरकार के एक डिपार्टमेंट ने अपने अकाउंट को क्लोज करने और बैलेंस ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट की। बैंक ने चेक किया तो पाया कि अकाउंट होल्डर जो बैलेंस क्लेम कर रहे थे, वो बैंक के सिस्टम में दिख रहे बैलेंस से बहुत ज्यादा था।

शुरुआत में कमी ₹490 करोड़ बताई गई, लेकिन आगे जांच में ये आंकड़ा बढ़कर ₹590 करोड़ तक पहुंच गया। बैंक का कहना है कि ये फ्रॉड बैंक के कुछ कर्मचारियों और बाहर के लोगों की मिलीभगत से हुआ। अनऑथराइज्ड ट्रांजेक्शन्स किए गए, जिससे डिपॉजिट में मिसमैच हो गया।

बैंक ने क्या एक्शन लिया?

  • 4 कर्मचारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया।

  • KPMG से फॉरेंसिक ऑडिट करवाया जा रहा है।

  • पुलिस में कंप्लेंट दर्ज की गई।

  • RBI को पूरी जानकारी दी गई।

CEO V Vaidyanathan ने इसे "isolated incident" बताया और कहा कि टॉप मैनेजमेंट इसमें इन्वॉल्व नहीं है। बैंक के पास पर्याप्त कैपिटल बफर है और वो इसे जल्दी सुलझा लेंगे। RBI गवर्नर ने भी कहा कि ये सिस्टमिक इश्यू नहीं है और पब्लिक को घबराने की जरूरत नहीं।

हरियाणा सरकार ने सख्ती दिखाई और IDFC First Bank को गवर्नमेंट बिजनेस से डी-एम्पैनल कर दिया। CM Nayab Singh Saini ने assurance दी कि "पैसा वापस आएगा"।

स्टॉक पर क्या असर पड़ा?

न्यूज आने के बाद 23 फरवरी को IDFC First Bank का शेयर 20% तक गिरा।

  • पिछले क्लोज से इंट्राडे लो: ₹66.85 (लगभग 20% करेक्शन)

  • क्लोजिंग पर करीब 16-17% डाउन रहा।

  • मार्केट कैप में भारी गिरावट आई – ₹14,000 करोड़+ का नुकसान।

  • ये बैंक के एक क्वार्टर के प्रॉफिट से भी ज्यादा अमाउंट है!

24 फरवरी को स्टॉक थोड़ा stabilize हुआ और हल्की रिकवरी दिखी, लेकिन ब्रोकरेजेस ने टारगेट प्राइस और earnings estimates काट दिए हैं। Investec, Nomura जैसी फर्म्स cautious हैं, लेकिन कुछ का मानना है कि अगर रिकवरी अच्छी हुई तो लॉन्ग-टर्म में मौका बन सकता है।

क्या सीख मिलती है?

ये केस फिर से याद दिलाता है कि बैंकिंग में इंटरनल कंट्रोल्स और गवर्नेंस कितने महत्वपूर्ण हैं। एक ब्रांच लेवल का फ्रॉड पूरे बैंक की इमेज और शेयर प्राइस को हिला सकता है। इन्वेस्टर्स के लिए ये reminder है – हमेशा लेटेस्ट डेवलपमेंट्स पर नजर रखें, खासकर जब कोई बड़ा फ्रॉड या रेगुलेटरी इश्यू सामने आए।

अगर आपके पास IDFC First Bank के शेयर हैं तो फिलहाल wait and watch की स्ट्रैटेजी अपनाएं। जांच पूरी होने और रिकवरी की डिटेल्स आने के बाद ही बड़ा फैसला लें।

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